नई दिल्ली, पवन जायसवाल। आमतौर पर देखा जाता है कि जब भू-राजनीतिक अस्थिरता पैदा होती है, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडराता है या इक्विटी बाजारों में गिरावट आती है, तो सोना सेफ हैवन के रूप में मजबूत होता है। अर्थात लोग निवेश में जोखिम को कम करने के लिए सोना खरीदते हैं, जिससे इसके भाव में तेजी आती है। इस समय में यह थ्योरी बिल्कुल गलत साबित हो रही है। इक्विटी बाजारों में जबरदस्त गिरावट के साथ ही सेफ हैवन समझे जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में भी अप्रत्याशित गिरावट देखी जा रही है। आइए जानते हैं कि सोने-चांदी में किन कारणों के चलते गिरावट आ रही है।

जानिए क्यों गिर रहे हैं सोने के भाव

जिस कारण से पहले सोने में तेजी आती थी, इस समय वही सोने में गिरावट की वजह बना हुआ है। दुनिया भर में औद्योगिक गतिविधियों में कमी आने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेतों के बीच इक्विटी बाजारों में ऐतिहासिक गिरावट ने निवेशकों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया। केडिया एडवाइजरी के मैनेजिंग डायरेक्टर और रिसर्च हेड अजय केडिया के अनुसार, मार्जिन भरने के लिए निवेशक पैसा निकाल रहे हैं और इसमें सोना निवेशकों के लिए एक बेस्ट विकल्प बना है। निवेशक इसमें प्रोफिट बुकिंग कर रहे हैं। यही कारण है कि सोने की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है।

ट्रेडिंग के दौरान पांच सत्रों में 6,500 रुपये तक गिरा भाव

एमसीएक्स एक्सचेंज पर सोने का वायदा भाव छह मार्च 2020 को 44,961 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था। इक्विटी बाजारों में जबरदस्त गिरावट के कारण प्रोफिट बुकिंग के चलते 16 मार्च 2020 यानी सोमवार को इसका भाव 38,400 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गया। इस तरह ट्रेंडिंग के दौरान सोने का वायदा भाव सिर्फ पांच सत्रों में 6,500 रुपये तक गिरा।

चांदी में गिरावट का है यह कारण

चांदी को बेस इकोनॉमी भी माना जाता है। बेस्ट थर्मल और इलेक्ट्रिकल कंडक्टर होने के कारण औद्योगिक क्षेत्र में चांदी का उपयोग बड़ी मात्रा में होता है। मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और सोलर पैनल्स आदि में इसका उपयोग होता है। केडिया के अनुसार, चीन में औद्योगिक उत्पादन ठप होने के चलते वहां चांदी की खपत बेहद कम हो गई है। ऐसी ही स्थिति कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित अन्य देशों में है। खपत की कमी ने चांदी के दामों में ऐतिहासिक गिरावट ला दी है। साथ ही निवेशकों द्वारा प्रोफिट बुकिंग करना भी चांदी के भाव में गिरावट का एक बड़ा कारण है।

करीब दो महीनों में 15,000 रुपये टूट गई चांदी

कोरोना वायरस के चलते औद्योगिक क्षेत्र में चांदी की खपत में कमी के कारण चांदी में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एमसीएक्स एक्सचेंज पर चांदी का वायदा भाव आठ जनवरी 2020 को 49,423 रुपये प्रति किलोग्राम पर था, जो सोमवार यानी 16 मार्च 2020 को 33,756 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक आ गया। इस तरह करीब दो महीनों में चांदी में 15,000 रुपये से अधिक की गिरावट देखने को मिली। सोमवार को चांदी में 16 फीसद की गिरावट दर्ज की गई थी, जो कि एमसीएक्स के इतिहास में चांदी में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट थी।

कोरोना प्रकोप के कम होने पर बढ़ेंगे चांदी के भाव

गरीबों का सोना समझी जाने वाली चांदी में इस समय भारी मंदी देखने को मिल रही है। अजय केडिया के अनुसार, जैसे ही इकोनॉमी पटरी पर आने लगेगी और चांदी की फिजिकल डिमांड में बढ़ोत्तरी होगी, तो उसके साथ ही चांदी के भाव में भी तेजी आनी शुरू हो जाएगी। केडिया कहते हैं कि यह चांदी में निवेश के लिए बेहतर समय हैं।

शादियों के सीजन से सोने में देखी जा सकती है तेजी

वैसे तो वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के चलते स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन केडिया का अनुमान है कि अभी सोने में 1,000 से 1,500 रुपये तक की गिरावट और देखने को मिल सकती है। वहीं, शादियों का सीजन शुरू होने से सोने के घरेलू भाव में इजाफा देखने को मिल सकता है। केडिया का मानना है कि यह सोना खरीदने के लिए भी सही मौका है।